Class 10 NCERT Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 6 Subhashitani

Class 10 NCERT Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 6 Subhashitani | HINDI TRANSLATION | QUESTION ANSWER | कक्षा – 10 संस्कृत शेमूषी भाग – 2 षष्ठः पाठः सुभाषितानि | हिन्दी अनुवाद | अभ्यास:

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षष्ठः पाठः

सुभाषितानि

Class 10 NCERT Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 6 Subhashitani

( हिन्दी अनुवाद )

प्रस्तुतोऽयं पाठः विविधग्रन्थात् सङ्कलितानां दशसुभाषितानां सङ्ग्रहो वर्तते। संस्कृतसाहित्ये सार्वभौमिकं सत्यं प्रकाशयितुम्  अर्थगाम्भीर्ययुता पद्यमयी प्रेरणात्मिका रचना सुभाषितमिति कथ्यते। अयं पाठांशः परिश्रमस्य महत्त्वम्, क्रोधस्य दुष्प्रभावः, सामाजिकमहत्त्वम्, सर्वेषां वस्तूनाम् उपादेयता, बुद्धेः वैशिष्ट्यम् इत्यादीन् विषयान् प्रकाशयति।

हिन्दी अनुवाद – प्रस्तुत यह पाठ अनेक ग्रंथो से संकलित दस सुभाषितों का संग्रह है। संस्कृत साहित्य में सार्वभौमिक सत्य को प्रकाशित करने के लिए अर्थ की गम्भीरता से युक्त पद्यमयी प्रेरणात्मक रचना को सुभाषित कहते हैं। इस पाठ में परिश्रम का महत्त्व, क्रोद्ध का दुष्प्रभाव, सामाजिक महत्त्व, सभी वस्तुओं की उपादेयता और बुद्धि की विशेषता इत्यादि विषयो पर प्रकाश डाला है।

Class 10 Sanskrit Chapter 6

1. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।

नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥1॥

अन्वय: –  मनुष्याणां शरीरस्थः महान् शत्रुः आलस्यम्। उद्यमसमः बन्धुः न अस्ति यं कृत्वा (मनुष्यः) न अवसीदति।

हिन्दी अनुवाद – निश्चय से आलस्य मनुष्यों के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा दुश्मन है। परिश्रम के समान उसका कोई मित्र नहीं है जिसको करके वह दुखी नहीं होता है।

Sanskrit Class 10 Chapter 6

2. गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणो,

बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः।

पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः,

करी च सिंहस्य बलं न मूषकः ॥2॥

अन्वयः – गुणी गुणं वेत्ति, निर्गुणं ( गुणं ) न वेत्ति, बली बलं वेत्ति, निर्बलः ( बलं ) न वेत्ति, वसन्तस्य गुणं पिकः ( वेत्ति ), वायसः न वेत्ति, सिंहस्य बलं करी ( वेत्ति ), मूषकः न।

हिन्दी अनुवाद – गुणवान् व्यक्ति गुण ( के महत्व ) को जानता है, गुणहीन नहीं जानता। बलवान् व्यक्ति बल ( के महत्व ) को जानता है, बलहीन ( निर्बल ) नहीं जानता है। कोयल वसन्त ऋतु के ( महत्व ) गुण को जानती है, कौआ नहीं जानता है और हाथी सिंह के बल को जानता है, चूहा नहीं जानता है।

NCERT Class 10 Chapter 6 Subhashitani Solution

3. निमित्तमुद्दिश्य हि यः प्रकुप्यति,

ध्रुवं स तस्यापगमे प्रसीदति।

अकारणद्वेषि मनस्तु यस्य वै,

कथं जनस्तं परितोषयिष्यति ॥3॥

अन्वयः – यः निमित्तम् उद्दिश्य प्रकुप्यति सः तस्य ( निमित्तस्य ) अपगमे ध्रुवं प्रसीदति यस्य मनः अकारणद्वेषि ( अस्ति ) जनः तं कथं परितोषयिष्यति।

हिन्दी अनुवाद – निश्चय से जो किसी कारण से अत्यधिक क्रोध करता है निश्चित रूप से वह उस कारण के समाप्त होने  पर प्रसन्न भी हो जाता है। परन्तु जिसका मन बिना किसी कारण के किसी से द्वेष करता है, ( फिर ) कैसे मनुष्य उसे सन्तुष्ट करेगा।

Chapter 6 Sanskrit Class 10

4. उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते,

हयाश्च नागाश्च वहन्ति बोधिताः।

अनुक्तमप्यूहति पण्डितो जनः,

परेङ्गितज्ञानफला हि बुद्धयः॥4॥

अन्वयः – पशुना अपि उदीरितः अर्थः गृह्यते, हयाः नागाः च बोधिताः ( भारं ) वहन्ति, पण्डितः जनः अनुक्तम् अपि ऊहति, बुद्धयः परेङ्गितज्ञानफलाः भवन्ति।

हिन्दी अनुवाद – कहा हुआ अर्थ पशु से भी ग्रहण कर लिया जाता है, घोड़े और हाथी भी कहे जाने पर बोझ को  ले जाते हैं। विद्वान बिना कहे ही बात को समझ  लेता है, क्योंकि बुद्धियाँ दूसरों के संकेत से उत्पन्न ज्ञान रूपी फल वाली होती हैं।

Class 10 Sanskrit Chapter 6 Question Answer

5. क्रोधो हि शत्रुः प्रथमो नराणां,

देहस्थितो देहविनाशनाय।

यथास्थितः काष्ठगतो हि वह्निः,

स एव वह्निर्दहते शरीरम् ॥5॥

अन्वयः – नराणां देहविनाशनाय प्रथमः शत्रुः देहस्थितः क्रोधः । यथा काष्ठगतः स्थितः वह्निः काष्ठम् एव दहते ( तथैव शरीरस्थः क्रोधः ) शरीरं दहते।

हिन्दी अनुवाद – निश्चय से मनुष्यों के शरीर में रहने वाला क्रोध शरीर को नष्ट करने के लिए  पहला शत्रु है। जैसे लकड़ी में स्थित आग उसे जलाने का कारण होती है, वही आग शरीर को भी जलाती है।

Sanskrit Chapter 6 Class 10

6. मृगाः मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति,

गावश्च गोभिः तुरगास्तुरङ्गैः।

मूर्खाश्च मूखैः सुधियः सुधीभिः,

समान-शील-व्यसनेषु सख्यम् ।।6।।

अन्वयः – मृगाः मृगैः सह, गावश्च गोभिः सह, तुरगाः तुरङ्गैः सह, मूर्खाः, मूर्खैः सह, सुधियः सुधीभिः सह अनुव्रजन्ति। समानशीलव्यसनेषु सख्यम् ( भवति )।

हिन्दी अनुवाद – मृग ( हिरण ) मृगों ( हिरणों ) के साथ पीछे-पीछे चलते हैं। गाएँ गायों के साथ, घोड़े-घोड़ों के साथ, मूर्ख मूर्खो के साथ तथा बुद्धिमान बुद्धिमानों के साथ जाते हैं ( क्योंकि ) समान व्यवहार और स्वभाव वालों में  मित्रता होती है।

Class 10 Sanskrit Chapter 6 Solution

7. सेवितव्यो महावृक्षः फलच्छायासमन्वितः।

यदि दैवात् फलं नास्ति छाया केन निवार्यते ॥7॥

अन्वयः –  फलच्छाया- समन्वितः महावृक्षः सेवितव्यः। दैवात् यदि फलं नास्ति (वृक्षस्य ) छाया केन निवार्यते।

हिन्दी अनुवाद – फल और छाया से युक्त महान वृक्ष आश्रय ( सहारा ) लेने योग्य होता है। यदि भाग्यवश फल न भी हों तो भी छाया किस के द्वारा रोकी जा सकती है ? अर्थात् किसी के द्वारा नहीं।

NCERT Class 10 Sanskrit Chapter 6

8. अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्।

अयोग्यः पुरुषः नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः ॥8॥

अन्वयः – अमन्त्रम् अक्षरं नास्ति, अनौषधम् मूलं नास्ति, अयोग्यः पुरुषः नास्ति, तत्र योजकः दुर्लभः।

हिन्दी अनुवाद – मन्त्र से रहित अक्षर नहीं होता है। जड़ जड़ी-बूटियों से रहित नहीं होती है। योग्यता से रहित व्यक्ति वास्तविक पुरुष नहीं होता है। वहाँ गुणों को वस्तुओं-व्यक्तियों से जोड़ने वाला दुर्लभ होता है।

Class 10th Sanskrit Chapter 6

9. संपत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता।

उदये सविता रक्तो रक्तोश्चास्तमये तथा ॥9॥

अन्वयः – महताम् संपत्तौ विपत्तौ च एकरूपता भवति। यथा सविता उदये रक्तः भवति। तथा एव अस्तमये च रक्तः भवति।

हिन्दी अनुवाद – धनवान होने और धनहीन होने पर महान् लोगों की एकरूपता ( एक जैसी कार्यशीलता ) होती है। जैसे उदय होते समय पर सूर्य लाल रंग का होता है तथा अस्त होने के समय पर भी लाल रंग का होता है।

NCERT Solutions For Class 10 Sanskrit Chapter 6

10. विचित्रे खलु संसारे नास्ति किञ्चिन्निरर्थकम्।

अश्वश्चेद् धावने वीरः भारस्य वहने खरः ॥10॥

अन्वयः –  विचित्रे संसारे खलु किञ्चित् निरर्थकं नास्ति। अश्वः चेत् धावने वीरः ( तर्हि ) भारस्य वहने खरः ( वीरः ) अस्ति।

हिन्दी अनुवाद – निश्चय से इस विचित्र ( अनोखे ) संसार में कुछ भी निरर्थक ( बेकार ) नहीं है। क्योंकि यदि घोड़ा दौड़ने में वीर होता है तो गधा भार को उठाने में ( ढोने ) में वीर  होता हैं।

Class 10 Chapter 6 Sanskrit

शब्दार्था:

अवसीदति – दुःखी होता है

वेत्ति – जानता है

वायसः – कौआ

करी – हाथी

निमित्तम् – कारण

प्रकुप्यति – अत्यधिक क्रोध करता है

ध्रुवं – निश्चित रूप से

अपगमे – समाप्त होने पर

प्रसीदति – प्रसन्न होता है

अकारणद्वेषि मनः – अकारण ही द्वेष करने वाला मन

Sanskrit Class 10 Chapter 6 Solution

परितोषयिष्यति – संतुष्ट करेगा

उदीरितः – कहा हुआ

गृह्यते – प्राप्त किया जाता है

हयाः – घोड़े

नागाः – हाथी

ऊहति – अंदाज़ा लगाता है

इङ्गितज्ञानफलाः – सङ्केतजन्य ज्ञानरूपी फल वाले

पण्डितः – बुद्धिमान

वह्निः – आग

दहते – जलाता है

Class 10 Sanskrit Ch 6

अनुव्रजन्ति – पीछे पीछे जाते है

तुरगाः – घोड़े

सुधियः – विद्वान, मनीषी

व्यसनेषु – बुरी आदतों में

सख्यम् – मित्रता

सेवितव्यः – आश्रय लेने योग्य

दैवात् – भाग्य से

निवार्यते – रोक जाता है

अमन्त्रम् – मन्त्रहीनं

मन्त्रः – मनन योग्य

Ch 6 Sanskrit Class 10

मूलम् – जड़

औषधम् – दवा, जड़ी- बूटी

योजकः – जोड़ने वाला

विता – सूर्य

खरः – गधा

अभ्यासः

प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत

NCERT Class 10 Sanskrit Chapter 6 Solution

(क) मनुष्याणां महान् रिपुः कः ?

उत्तर. आलस्यं

(ख) गुणी किं वेत्ति ?

उत्तर. गुणम्

(ग) केषां सम्पत्तौ च विपत्तौ च महताम्  एकरूपता ?

उत्तर. महापुरूषाणाम्।

(घ) पशुना अपि कीदृशः गृह्यते ?

उत्तर. उदीरितः अर्थः

(ङ) उदयसमये अस्तसमये च कः रक्तः भवति ?

उत्तर. सूर्यः

प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

Class 10 Sanskrit Chapter 6 Question Answer

(क) केन समः बन्धुः नास्ति ?

उत्तर. उद्यमेन समः बन्धुः नास्ति।

(ख) वसन्तस्य गुणं कः जानाति।

उत्तर. वसन्तस्य गुणं पिक: जानाति।

(ग) बुद्धयः कीदृश्यः भवन्ति ?

उत्तर. बुद्धयः परेङ्गितज्ञानफलाः भवन्ति।

(घ) नराणां प्रथमः शत्रुः कः ?

उत्तर. नराणां प्रथमः शत्रुः क्रोधः अस्ति।

(ङ) सुधियः सख्यं केन सह भवति ?

उत्तर. सुधियः सख्यं सुधीभिः सह भवति।

(च) अस्माभिः कीदृशः वृक्षः सेवितव्यः ?

उत्तर. अस्माभिः फलच्छायासमन्वितः महावृक्षः सेवितव्यः।

प्रश्न 3. अधोलिखिते अन्वयद्वये रिक्तस्थानपूर्तिं कुरुत

NCERT Sanskrit Class 10 Chapter 6

(क) यः निमित्तम् उद्दिश्य प्रकुप्यति तस्य अपगमे सः ध्रुवं प्रसीदति। यस्य मनः अकारणद्वेषि अस्ति, जनः तं कथं परितोषयिष्यति।

(ख) विचित्रे संसारे खलु किञ्चित् निरर्थकम् नास्ति। अश्वः चेत् धावने वीरः, खरः भारस्य वहने ( वीरः ) ( भवति )।

प्रश्न 4. अधोलिखितानां वाक्यानां कृते समानार्थकान् श्लोकांशान् पाठात् चित्वा लिखत

Sanskrit 10th Class Chapter 6

(क) विद्वान् स एव भवति यः अनुक्तम् अपि तथ्यं जानाति।

उत्तर. अनुक्तमप्यूहति पण्डितोजनः।

(ख) मनुष्यः समस्वभावैः जनैः सह मित्रतां करोति।

उत्तर. समान-शील-व्यसनेषु सख्यम्।

(ग) परिश्रमं कुर्वाणः नरः कदापि दु:खं न प्राप्नोति।

उत्तर. नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।

(घ) महान्तः जनाः सर्वदैव समप्रकृतयः भवन्ति।

उत्तर. सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता।

प्रश्न 5. यथानिर्देशं परिवर्तनं विधाय वाक्यानि रचयत

Class 10 Ka Sanskrit Chapter 6

(क) गुणी गुणं जानाति। ( बहुवचने )

उत्तर. गुणिनः गुणान् जानन्ति।

(ख) पशुः उदीरितम् अर्थं गृह्णाति। ( कर्मवाच्ये )

उत्तर. पशुना उदीरितः अर्थः गृह्यते।

(ग) मृगाः मृगैः सह अनुव्रजन्ति। ( एकवचने )

उत्तर. मृगः मृगेण सह अनुव्रजति।

(घ) कः छायां निवारयति। ( कर्मवाच्ये )

उत्तर. केन छाया निवार्यते ?

(ङ) तेन एव वह्निना दह्यते। ( कर्तृवाच्ये )

उत्तर. सः एव वह्निः शरीरं दहति।

प्रश्न 6. (अ) सन्धिं/सन्धिविच्छेदं कुरुत

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उत्तर: (क) न + अस्ति + उद्यमसमः – नास्त्युद्यमसमः

(ख) तस्य + अपगमे – तस्यापगमे

(ग) अनुक्तम् + अपि + ऊहति – अनुक्तमप्यूहति

(घ) गावः + – गावश्च

(ङ) + अस्ति – नास्ति

(च) रक्तः + च + अस्तमये – रक्तश्चास्तमये

(छ) योजकः + तत्र – योजकस्तत्र

(आ) समस्तपदं/विग्रहं लिखत

Class 10 Sanskrit Chapter 6 Solutions

उत्तर: (क) उद्यमसमःउद्यमेन समः
(ख) शरीरे स्थितःशरीरस्थः
(ग) निर्बलःबलेन हीनः
(घ) देहस्य विनाशनायदेहविनाशाय
(ङ) महावृक्ष:महान् च असौ वृक्षः
(च) समानं शीलं व्यसनं येषां तेषुसमानशीलव्यसनेषु
(छ) अयोग्यःन योग्यः

प्रश्न 7. अधोलिखितानां पदानां विलोमपदानि पाठात् चित्वा लिखत

Class 10 Sanskrit Chapter 6 Exercise

उत्तर: (क) प्रसीदति – अवसीदति

(ख) मूर्खः – पण्डितः

(ग) बली – निर्बलः

(घ) सुलभः – दुर्लभः

(ङ) संपत्तौ – विपत्तौ

(च) अस्तमये – उदये

(छ) सार्थकम् – निरर्थकम्

(अ) संस्कृतेन वाक्यप्रयोगं कुरुत

उत्तर: (क) वायसः – वायसः कृष्णः वर्णः भवति।

(ख) निमित्तम् – भवतः आगमनस्य निमित्तम् किम् ?

(ग) सूर्यः – सूर्यः पश्चिमदिशायाम् अस्तः भवति।

(घ) पिकः – पिकः मधुरं गायति।

(ङ) वह्निः – देवानां मुखम् वह्निः भवति।

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